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कौशल विकास कार्यक्रम

स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा में डिप्‍लोमा (डीएचपीई)

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स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा में डिप्‍लोमा (डीएचपीई)

स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय की योजना ''स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा विशेषज्ञों और परा-चिकित्‍सा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए राष्‍ट्रीय प्रशिक्षित स्‍वास्‍थ्‍य जनशक्ति का विकास'' के तहत स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा में डिप्‍लोमा पाठ्यक्रम (डीएचई) की शुरुआत वर्ष 1987 में की गई। वर्ष 2000 में, पाठ्यक्रम का नाम बदलकर 'स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा में डिप्‍लोमा (डीएचपीई) कर दिया गया था। यह एकवर्षीय आवासीय डिप्‍लोमा है जिसे अंतर्राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या विज्ञान संस्‍थान (आईआईपीएस), , स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रायल के तहत एक मानद विश्‍वविद्यालय, द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त है।

इस डीएचपीई पाठ्यक्रम के तहत 21 प्रशिणार्थियों सहित इकतीसवां (31वां) बैच मई 2017 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। डीएचपीई का 32वां बैच जून 2018 में शुरु किया गया जिसमें महाराष्‍ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, नागालैंड और मध्‍य प्रदेश राज्‍यों से 23 प्रशिणार्थी हैं।

पाठ्यक्रम के उद्देश्‍य

सामान्‍य उद्देश्‍य

प्रभावकारी स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा गतिविधियां उपलब्‍ध कराने हेतु अपेक्षित स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा विशेषज्ञों का विकास करना।

विशिष्‍ट उद्देश्‍य

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंत में, छात्र निम्‍नलिखित में सक्षम होगा-

  1. प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य विज्ञानों से प्राप्‍त ज्ञान का स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा में उपयोग करना।
  2. समुदाय के स्‍वास्‍थ्‍य संव्‍यहवार में वांछित बदलाव लाने के बारे में समुदाय संगठन और समुदाय विकास के साथ संव्‍यहारात्‍मक विज्ञानों से प्राप्‍त ज्ञान को साझा व उपयोग करना तथा समुदाय में स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा कार्यक्रम बनाना।
  3. कार्यक्रम के नियोजन के लिए तथा स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित अनुसंधान अध्‍ययन एवं स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षणों का आयोजन करने के लिए समुदाय की वर्तमान जॉब स्थिति के अनुसार साधारण सांख्यिकीय विधियों और जनसांख्यिकीय तकनीकों का उपयोग करना।
  4. समुदाय में स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा विशेषज्ञों की भूमिका निभाना, स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा की अवधारणाओं, सिद्धांतों, उद्देश्‍यों और अभिगमों (एप्रोच) के उचित अनुप्रयोग द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा कार्यक्रमों को प्रभावकारी रूप से आयोजित करना।
  5. स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा गतिविधियों के साथ-साथ राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रमों के आईईसी घटक के प्रभावकारी कार्यान्‍वयन के लिए जन स्‍वास्‍थ्‍य प्रशासन में स्‍वास्‍थ्‍य नीति, स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या सुपुर्दगी प्रणाली, कौशल विकास के बारे में वर्णन करना।
  6. समुदाय में स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा में प्रचार-प्रसार (एडवोकेसी) के लिए एक दक्ष संप्रेषक बनना।
  7. पहचान की गई स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर स्‍पष्‍ट एवं सकारात्‍मक सोच के साथ समुदाय में स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा कार्यक्रमों पर योजना बनाना, उनका कार्यान्‍वयन और मूल्‍यांकन करना।

प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड

उम्‍मीदवार निम्‍नलिखित में से कोई भी पात्रता मानदंड को पूरा करता हो :-

क्र. सं विवरण
1. (क) स्‍वास्‍थ्‍य/ शिक्षा / कल्‍याण आदि में तीन वर्षों के अनुभव के साथ मनोविज्ञान / अर्थशास्‍त्र / नृविज्ञान / सांख्यिकी / सामाजिक विज्ञान / शिक्षा / संचार / सामाजिक कार्य/ आहार विज्ञान में स्‍नातक।
  (ख) परिचर्या (नर्सिंग) या अन्‍य पराचिकित्‍सा क्षेत्रों में स्‍नातक।
  स्‍नातक की उपाधि किसी यूजीसी मान्‍यताप्राप्‍त विश्‍वविद्यालय से होनी चाहिए।
2. आयु 40 वर्षों से अधिक नहीं होनी चाहिए, अ.जा./अ.ज.जा. के आरक्षित उम्‍मीदवारों के लिए केवल पांच वर्ष और अ.पि.व. उम्‍मीदवारों के लिए 3 वर्ष की छूट है।
3. केंद्र / राज्‍य सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण विभाग में सेवारत उम्‍मीदवारों और स्‍वास्‍थ्‍य परिचर्या सेवाओं की प्रत्‍यक्ष सुपुर्दगी में कार्यरत उम्‍मीदवारों को वरीयता दी जाएगी। स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में कार्यरत राष्‍ट्रीय स्‍तरीय मान्‍यताप्राप्‍त गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से जुड़े लोगों को स्‍वीकार किया जाएगा।
4. अ.जा./अ.ज.जा. और दिव्‍यांगजनों के लिए आरक्षण भारत सरकार के नियमों के अनुसार दिया जाएगा। मान्‍यताप्राप्‍त जिला प्राधिकारी से एक प्रमाण-पत्र को आवेदन प्रपत्र प्रस्‍तुत करने के समय पर संलग्‍न किया जाना चाहिए।
5. सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य में ग्रामीण क्षेत्रों/कम कार्यप्रदर्शन वाले जिलों में सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों में कार्यरत उपर्युक्‍त योग्‍यताओं वाले किसी भी व्‍यक्ति-विशेष को वरीयता दी जाएगी।
6. राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य सेवा निदेशालय द्वारा प्रायोजित उम्‍मीदवारों को प्रवेश में वरीयता दी जाएगी।
7. इस पाठ्यक्रम के लिए पढ़ाई करने का माध्‍यम (मीडियम) अंग्रेजी भाषा है।
8. चयन समिति का निर्णय अंतिम होगा।
9. डी.एच.पी.ई. पाठ्यक्रम एकवर्षीय (जून से मई) पूर्णकालिक आवासीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है।
10. किसी भी छात्र को संस्‍थान में पंजीकृत रहने की अवधि के दौरान पूर्णकालिक या अंशकालिक रूप से अध्‍ययन के किसी भी पाठ्यक्रम में रोजगार, या प्रतिभागिता करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अवधि

जून से मई के दौरान एकवर्षीय पूर्णकालिक, आवासीय कार्यक्रम।

पाठ्यक्रम की विषयवस्‍तु

पाठ्यक्रम के अंतर्गत चार विषयों के साथ दो सेमेस्‍टर होंगे;

सेमेस्‍टर I

  • प्रश्‍न पत्र 1 - प्राथमिक विज्ञानों के साथ स्‍वास्‍थ्‍य एवं स्‍वच्‍छता (हैल्‍थ एण्‍ड हाइजीन)
  • प्रश्‍न पत्र 2 - संव्‍यहारात्‍मक और सामाजिक विज्ञान
  • प्रश्‍न पत्र 3 - अनुसंधान विधियां और सांख्यिकी
  • प्रश्‍न पत्र 4 - स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा भाग-I

सेमेस्‍टर II

  • प्रश्‍न पत्र 5 - महामारी विज्ञान
  • प्रश्‍न पत्र 6 - जनसंख्‍या की गतिकियां और स्‍वास्‍थ्‍य कल्‍याण
  • प्रश्‍न पत्र 7 - स्‍वास्‍थ्‍य नीतियां और कार्यक्रम
  • प्रश्‍न पत्र 8 - स्‍वास्‍थ्‍य संवर्धन शिक्षा – II

परीक्षा

इस पाठ्यक्रम के अंतर्गत दो सेमेस्‍टर परीक्षाएं हैं जिन्‍हें क्रमश: अक्टूबर और फरवरी में संचालित किया जाता है। दोनों सेमेस्‍टरों की परीक्षा के दौरान सेंट्रल पेपर में त्रुटियों को सुधारा जाता है।

सबंद्धता (Affiliation):

डीएचपीई पाठ्क्रम अंतर्राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या विज्ञान संस्‍थान (आईआईपीएस), मुंबई (मानद विश्‍वविद्यालय) से संबद्ध है।

प्रत्‍यक्ष ग्रेडिंग प्रणाली

विकल्‍प आधारित क्रेडिट प्रणाली के अनुसार, वर्तमान स्‍नातक एवं समतुल्‍य अंकों का विवरण निम्‍न प्रकार है -

ग्रेड और ग्रेड प्‍वांइट

गुणवत्तात्‍मक स्‍तर लेटर ग्रेड संख्‍यात्‍मक मान अंको का समतुल्‍य %
अद्वितीय (आउटस्‍टेंडिंग) O 10 85-100
उत्‍कृष्‍ट (एक्‍सेलेंट)  A+ 9 75-84.9
बहुत अच्‍छा A 8 65-74.9
अच्‍छा  B+ 7 55-64.9
औसत से ऊपर B 6 50-54.9
औसत C 5 45-49.9
उत्तीर्ण P 4 40-44.9
अनुतीर्ण  F+ 3 30-39.9
अनुतीर्ण F 2 20-29.9
अनुतीर्ण  F- 1 0-19.9
अनुत्तरित/अनुपस्थित NA 0 ..